मर्दाना ताकत और आंखों की रोशनी का इलाज।
पदार्थ/इलाज | फायदे |
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कमर का गोश्त |
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खुम्बी |
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चुकन्दर |
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आंख दुखने का इलाज |
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निगाह तेज़ करने का इलाज |
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चलिए जानते है किस तरह से मर्दाना ताकत और आंखों की रोशनी को हम बड़ा सकते है ।और क्या क्या चीजे ऐसी है जिनकी मदद से इलाज किया जा सकता है।
मर्दाना ताकत का इलाज
इलाज अबु नईम ने अब्दुल्लाह बिन जाफ़र से रिवायत की है कि नवी सल्ल० ने इर्शाद फरमाया कि कमर का गोश्त तमाम गोश्तों में बेहतर होता है। उलमा ने लिखा है कि इसमें हिक्मत यह है कि इस गोश्त में मर्दाना ताकत अधिक होती है और जल्द हजम हो जाता है। सीने में ताकत पैदा करता है और कमर के दर्द के लिए लाभदायक है।
खुम्बी से आँखों की बीमारी का इलाज
इलाज - जामे कबीर में हज़रत अली रजि० ने रिवायत की है कि नबी सल्ल० ने इर्शाद फ़रमायाः खुम्बी में आंखों की बीमारी के लिए शिफा है और अबु नईम ने हज़रत अनस बिन मालिक से रिवायत की है कि नबी सल्ल० का इर्शाद है जब हँस पड़ी जन्नत तो उसमें से खुम्बी निकली और हँसी ज़मीन तो उसमें से ख़ज़ाना निकला।
उलमा ने लिखा है कि खुम्बी की तीन किस्म हैं- एक मवेज़ी जो काली होती है उसमें ज़हर होता है। उसको कभी इस्तेमाल न करना चाहिए। दूसरी सफेदी और सुर्खी मिली होती है। इसका इस्तेमाल भी अच्छा नहीं है। तीसरी किस्म सफेद होती है इसका पानी आँखों के लिए बड़ा मुफीद है। और यदि आंखों में सफेदी होती है तो इसके पानी को कई दिन लगाना चाहिए। इन्शाअल्लाह बहुत जल्द शिफा होगी। इसके इस्तेमाल से नज़र तेज़ होती है।
कुछ उलमा ने लिखा है कि यदि गर्मी से आँख दुखने आ जाए तो केवल इसका पानी काफी नहीं होगा। दूसरी दवाओं के साथ मिलाकर अलबत्ता फायदा होगा। कुछ हकीमों की राय है कि सर्दी से आंख दुखने आए तो इसके पानी में सुरमा भिगो दिया जाए और चालीस दिन बाद इसे पीस कर इस्तेमाल करना चाहिए। वैलमी कहते हैं कि मैंने इसका तर्जुबा किया है इस तरह कि एक लौंडी की आंख दुखने आई थी। सारे हकीमों ने कह दिया कि हम इसका इलाज नहीं कर सकते। तब मैंने नबी करीम सल्ल० के इर्शाद के अनुसार कई दिनों तक खुम्बी के पानी को उसकी आंख में लगाया। अल्लाह के फल से उसकी आंख अच्छी हो गई। अबू नईम ने कहा है कि सारे हकीम इस बात पर सहमत हैं कि खुम्बी में शिफा है आंख के लिए। मगर इसका ख्याल ज़रूरी है कि आंख गर्मी से दुखती है या सर्दी से।
खुम्बी की खासियतें
इसे सुखाकर पीस कर खाने से दस्त बन्द हो जाते हैं। सिरका में मिला कर लेप करने से टली हुई नाफ अपनी जगह पर आ जाती है अगर हमेशा खाई जाए तो औलाद होना बन्द हो जाए। यह गलीज़ माद्दा पैदा करती है और इसकी अधिकता सुद्दे पैदा करती है। मेदे का दर्द और कूलंज-जैसी बीमारी पैदा करती है।
कुछ उलमा ने लिखा है कि यदि गर्मी से आँख दुखने आ जाए तो केवल इसका पानी काफी नहीं होगा। दूसरी दवाओं के साथ मिलाकर अलबत्ता फायदा होगा। कुछ हकीमों की राय है कि सर्दी से आंख दुखने आए तो इसके पानी में सुरमा भिगो दिया जाए और चालीस दिन बाद इसे पीस कर इस्तेमाल करना चाहिए। वैलमी कहते हैं कि मैंने इसका तर्जुबा किया है इस तरह कि एक लौंडी की आंख दुखने आई थी। सारे हकीमों ने कह दिया कि हम इसका इलाज नहीं कर सकते। तब मैंने नबी करीम सल्ल० के इर्शाद के अनुसार कई दिनों तक खुम्बी के पानी को उसकी आंख में लगाया। अल्लाह के फल से उसकी आंख अच्छी हो गई। अबू नईम ने कहा है कि सारे हकीम इस बात पर सहमत हैं कि खुम्बी में शिफा है आंख के लिए। मगर इसका ख्याल ज़रूरी है कि आंख गर्मी से दुखती है या सर्दी से।
ताकत की कमी और मर्दाना ताकत में तेज़ी
तिर्मिज़ी आदि में उम्मे मुन्ज़िर रजि० से रिवायत है कि एक बार नबी करीम सल्ल० मेरे पास हज़रत अली रजि० के साथ
तशरीफ लाए उस समय खजूर के गुच्छे लटके हुए थे। नवी सल्ल० ने इन खजूरों में से खायी तो हज़रत अली भी खाने लगे। इस पर आपने फरमाया कि ऐ अली! तुम कमज़ोर हो इसलिए तुम यह न खाओ। उम्मे मुन्ज़िर कहती हैं। इसके बाद मैंने चुकन्दर खाए तो नबी सल्ल० ने हज़रत अली से फरमाया कि इसमें से खाओ क्योंकि यह तुम्हारे लिए फायदेमन्द है।
उलमा ने लिखा है कि हज़रत अली रजि० की उन दिनों आंखें दुख रही थीं। दुखती आंखों में खजूर खाना हानिकारक है इसलिए आप (सल्ल०) ने हज़रत अली को मना फरमाया और जब आपके सामने चुक़न्दर पेश किए गए तो आपने हज़रत अली से कहा कि तुम यह खाओ। ये तुम्हारे लिए फायदेमन्द है और यह
तुम्हारी कमज़ोरी को दूर कर देंगे। इस हदीस से पता चला कि परहेज़ करना सुन्नत है और यह भी मालूम हुआ कि चुकन्दर खाने से कमज़ोरी दूर हो जाती है इसी लिए उलमा ने लिखा है कि चुकन्दर मेदे को जिला करता है। खाना हज़म करता है और गर्मी को मारता है। सुद्दों को खोलता है।ग्लगम उखाड़ता है। कपकपाहट के लिए मुफीद है। कमज़ोरी को दूर करके मर्दाना ताकत में हरकत व तेज़ी पैदा करता है।
आंख दुखने का इलाज
इलाज- जामे कबीर में हज़रत उम्मे सलमा रजि० से रिवायत है कि जब किसी बीबी की आंख दुखने को आती थी तो नबी सल्ल० उससे कुरबत न फरमाते थे जब तक वह स्वस्थ न हो जाती थी। इस हदीस से पता चला कि आंख दुखने में कुरबत करना तकलीफ को बढ़ाता है।
निगाह तेज़ होने का इलाज
इलाज - जामे कबीर में हज़रत आइशा सिद्दीका रजि० से रिवायत है कि नबी सल्ल० के निकट तमाम रंगों में सब्ज रंग प्यारा था। एक और हदीस में है कि आपने फरमाया "जारी पानी और सब्ज़ रंग देखने से नज़र तेज़ होती है।"
कुछ किताबों में लिखा है कि गर्मी में यदि कोई आदमी सब्ज़ रंग का चश्मा इस्तेमाल करे तो उसकी नज़र तेज़ होती है और सर्दियों में नुकसान पहुंचाती है।आम जिस्मानी कमज़ोरी और
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